Type Here to Get Search Results !

Bottom Ad

बवासीर से घबरायें नहीं, जीवनशैली बदलें- डा. वी.के. वर्मा



बवासीर से घबरायें नहीं, जीवनशैली बदलें- डा. वी.के. वर्मा
बवासीर एक ऐसी बीमारी है जो सेहत को बुरी तरह से प्रभावित करती है। यह मलाशय और गुदा के निचले हिस्से में स्थित नसों की सूजन है, जो दर्द, खुजली और मल के साथ खून आने का कारण बनती है। यह मुख्य रूप से पेट के निचले हिस्से में लगातार दबाव, पुराने कब्ज, गर्भावस्था या शौचालय में लंबे समय तक बैठने के कारण होता है। बस्ती जिला अस्पताल के आयुष चिकित्साधिकारी डा. वी.के. वर्मा ने बवासीर के कारण और उपचार के बारे मे विस्तार से जानकारी दी।


बवासीर के लक्षण और प्रकार

आंतरिक बवासीरः यह गुदा के अंदर होता है, इसमें आम तौर पर कम दर्द होता है लेकिन मल के साथ लाल खून आ सकता है। जबकि बाहरी बवासीर गुदा के बाहर की त्वचा के नीचे होता है, इसमें अत्यधिक खुजली, दर्द और सूजन होती है। 


बचाव के उपाय

पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। फाइबर युक्त भोजन (फल, सब्जियां) खाएं। शौच करते समय जोर न लगाएं और नियमित व्यायाम करें। 


बवासीर का उपचार 

फाइबर युक्त आहार, पर्याप्त पानी (2-3 लीटर), और सिट्ज़ बाथ (गुनगुने पानी में बैठना) बवासीर से राहत दिला सकता है। प्रारंभिक अवस्था में जीवनशैली में बदलाव, मल को नरम रखने की दवाएं, और दर्द निवारक क्रीम से आराम मिल सकता है। गंभीर मामलों में लेजर या सर्जरी की आवश्यकता भी हो सकती है, इसलिए डॉक्टर से परामर्श जरूरी है। 


बवासीर के प्रमुख घरेलू नुस्खे

सिट्ज़ बाथ यानी गुनगुने पानी के टब में 15-20 मिनट तक बैठने से दर्द और सूजन में बहुत राहत मिलती है। फाइबर कब्ज दूर करता है। खाने में ओट्स, दलिया, हरी सब्जियां, और छिलके वाले फल शामिल करें। दिन में 8-10 गिलास पानी पीयें। दर्द और सूजन कम करने के लिए प्रभावित क्षेत्र पर बर्फ से सिकाई करें। इसके साथ ही मस्सों पर एलोवेरा जेल या नारियल का तेल लगाने से जलन में राहत मिलती है। रात को गुनगुने दूध या पानी के साथ ईसबगोल लेने से मल नरम होता है और इसका त्याग करना आसान हो जाता है। 


बवासीर मे परहेज

बवासीर के मरीजों को मिर्च-मसालेदार, तला-भुना और फास्ट फूड, मैदा, जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड तथा ज्यादा चाय या कॉफी से बंचना चाहिये।


होम्योपैथी मे उपचार

डा. वी.के. वर्मा के अनुसार एस्कुलस, नक्सवोमिका, हेमामैलिस, सल्फर थूजा, कल्केरिया फ्लोर, साइलीसिया, चायना, लाइकोपोडियम, एलो सोकोट्रिना, म्यूरियेटिक एसिड, रैटनिया, कल्केरिया कार्व, इग्नैशिया, ग्रेफाइटिस, कास्टिकम आदि दवायें लक्षणानुसार चिकित्सक के परामर्श पर उचित मात्रा मे ली जा सकती हैं।



Tags

Post a Comment

0 Comments

Below Post Ad

NAVYUG MEDICAL CENTRE

 

KRISHNA MISSION HOSPITAL
PATEL SMH HOSPITAL GOTWA
ROTARY CLUB BASTI CENTRAL

 

Dr. D.K. Gupta

Bottom Ad