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संतोष दूबे का दावा, राम मंदिर से दान के करोड़ों रूपये ही नही, बेशकीमती शिलायें भी गायब


संतोष दूबे का दावा, राम मंदिर से दान
के करोड़ों रूपये ही नही, बेशकीमती शिलायें भी गायब

अयोध्या, उ.प्र.। राम मंदिर के नाम पर चंदे और बेशकीमती शिलाओ की चोरी कोई नई घटना नही है। 1989 से ये लूट हो रही है। यह दावा है राम मंदिर आन्दोलन से जुड़े धर्म सेना के संस्थापक संतोष दूबे का। दान मे मिले सैकड़ां करोड़ रूपये गायब होने के आरोपों की जांच के बीच रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की अयोध्या और लखनऊ में करीब 50 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियां सामने आई हैं। 


उसका पुश्तैनी मकान राम मंदिर से 1.5 किमी दूर स्वर्गद्वार इलाके में है। वहां इस वक्त उनके भाई रहते हैं। 13 जून को ट्रस्ट और मंदिर सुरक्षा से जुड़े 6 लोगों की टीम यहां जांच को पहुंची। टिन्नू के घर से सोना बरामद कर टीम अपने साथ ले गई। टिन्नू अयोध्या में ऑटो चलाता था। खुद एक बाइक से चलता था। यहां बातचीत में सामने आया कि टिन्नू का एयरपोर्ट के पास हॉस्टल है, जिसमें 70 कमरे हैं। माना जा रहा कि जल्द ही ट्रस्ट और सुरक्षा से जुड़े लोग हॉस्टल में भी सर्च कर सकते हैं। टिन्नू अभी राम मंदिर परिसर के ही पीसीएफ यात्री सुविधा केंद्र में है। यहीं उससे पछताछ चल रही है।



मंदिर में दान में चढ़ने वाले सोने-चांदी के जेवरों को संभालने की जिम्मेदारी केडी तिवारी की है। वह भी संदेह के घेरे में हैं। पीसीएफ यात्री सुविधा केंद्र में ट्रस्ट के सदस्यों के सवालों के जवाब दे चुके हैं। 2 दिन पहले इनके घर भी ट्रस्ट और सुरक्षा अधिकारियों की टीम ने छापेमारी की। केडी तिवारी ने 1.5 करोड़ रुपए की जमीन खरीदी है, जो जांच के दायरे में है। केडी तिवारी कहते हैं- मेरी जिम्मेदारी मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के दान किए गए सोने-चांदी के गहनों को तौलकर दानदाता को रसीद देने की थी। फिर उन गहनों को ट्रस्ट के जिम्मेदार अधिकारियों तक सुरक्षित पहुंचा देता था। 


इसके आगे गहनों के साथ क्या प्रक्रिया अपनाई जाती है, यह मुझे नहीं पता है। सावन के झूला मेले के समय भगवान राम का उनके तीनों भाइयों- भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न के साथ विशेष श्रृंगार कराया जाता है। परंपरा के अनुसार, झूलन उत्सव पर चारों भाइयों को सोने के मुकुट पहनाए जाते हैं। फिर उन्हें झूले पर विराजमान कर भक्तों को दर्शन कराए जाते हैं। 2 साल पहले की बात है, रामलला और उनके तीनों भाइयों के सोने के मुकुट गायब हो गए। कई महीनों तक मुकुट का पता नहीं चला। सावन मेले के दौरान जब रामलला के पुजारियों ने बार-बार मुकुट की मांग की, तो खोजबीन शुरू हुई।


तलाशी में मंदिर परिसर में ट्रस्ट के एक पदाधिकारी की अलमारी से मुकुट मिले थे। सूत्रों के अनुसार, ये मुकुट गाजियाबाद के एक श्रद्धालु ने अपनी मां के जेवर बेचकर रामलला को भेंट किए थे। बहुत से श्रद्धालु सोने-चांदी के जेवर दानपात्र में ही डाल देते थे। सूत्रों के अनुसार, इसका लोखा-जोखा भी ठीक से तैयार नहीं होता। दानपात्र से केवल कैश की गिनती होती रही। सोने-चांदी जैसी धातुओं का उल्लेख न के बराबर ही किया जाता रहा। रामलला को चढ़ावे में आने वाले सोने-चांदी में उन्हीं का लेखा-जोखा तैयार होता रहा, जो ट्रस्ट कार्यालय में ही जमा किए जाते रहे। जबकि, भीड़ के दौरान आम श्रद्धालुओं की पहुंच इस कार्यालय तक नहीं हो पाती थी। 


सूत्रों के अनुसार, रामलला के दानपात्र से कैश से ज्यादा सोने, चांदी आदि धातुओं की चोरी की जाती रही। पहले धातुओं को चुराया गया, फिर कैश पर भी हाथ साफ किया जाने लगा। धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे का दावा है कि 1989 में गांव-गांव, शहर-शहर और देश-विदेश से पूजित होकर अयोध्या आईं सोने-चांदी, हीरे-माणिक्य और अष्टधातु की 1250 शिलाएं अब ’गायब’ हो चुकी हैं। ये शिलाएं 2002 तक कारसेवकपुरम में रहीं। संतोष दुबे के मुताबिक, सोने-चांदी की शिलाओं की देख-रेख का जिम्मा भी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पास था। ये शिलाएं कारसेवकपुरम में जहां सुरक्षित रखी गई थीं, वहां 3 ताले लगे थे। फिर ये शिलाएं कहां गायब हो गईं, यह किसी को नहीं पता है।


कौन हैं संतोष दूबे

संतोष दूबे कोई साधारण व्यक्ति नही है। उन्होने अपनी जवानी राम मंदिर आन्दोलन को समर्पित कर दिया। 1990 मे कारसेवा के दौरान उन्हे चार गोलियां लगी थीं। शरीर की 17 हड्डियां टूटी थीं और 22 दिन कोमा मे थे। आज वे पूरी तरह से स्वस्थ हैं। लेकिन राम मंदिर के नाम पर हुई करोड़ों रूपये  और बेशकीमती सोने, हीरे जड़ी शिलाओं की चेरी से वे बेहद दुखी हैं। 

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