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बलिया मे पुलिस की पिटाई से निर्दोष की मौत, हंगामे के बाद कई पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज

बलिया मे पुलिस की पिटाई से निर्दोष की मौत,
हंगामे के बाद कई पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज

यूपी डेस्कः
बलिया जिले मे रेवती थाना क्षेत्र के गायघाट गांव में पुलिस की थर्ड डिग्री से एक व्यक्ति की मौत हो गई। पुलिस उपनिरीक्षक, आरक्षी और ग्राम प्रधान सहित 6 लोगों के खिलाफ हत्या और अन्य संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर मामले की विवेचना की जा रही है। पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने बताया कि रेवती थाने के प्रभारी राज केशर सिंह को कर्तव्य में लापरवाही, अनुशासनहीनता, मनमाना आचरण और अक्षमता के आरोप में पुलिस लाइन स्थानांतरित किया गया है। 


इसी मामले में आरोपी उपनिरीक्षक सचिन सरोज और कांस्टेबल अंकित सिंह को निलंबित किया गया है। पुलिस उप महानिरीक्षक सुनील सिंह ने रविवार को घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद पुलिस लाइन के पुलिस उपाधीक्षक को जांच सौंपी है। मामले की मजिस्ट्रेटी जांच की भी सिफारिश की जा रही है। डीआईजी ने मौका मुआयना के बाद थानेदार राजकेशर सिंह को लाइन हाज़िर किया है. दरोगा सचिन सरोज और सिपाही अंकित सिंह सस्पेंड किये गए है. इससे पहले सिपाही, दरोगा और ग्रामप्रधान समेत 6 आरोपियों के ख़लिफ़ हत्या का केस दर्ज किया गया है. 


बैरिया क्षेत्र के पुलिस क्षेत्राधिकारी आलोक गुप्ता ने बताया था कि रेवती थाना क्षेत्र के गायघाट निवासी विशाल गोंड की तहरीर पर उपनिरीक्षक सचिन सरोज, कांस्टेबल अंकित सिंह, ग्राम प्रधान आशुतोष शंकर सिंह, सूरज कन्नौजिया, उसके एक रिश्तेदार और प्रधान के चालक मनीष यादव के खिलाफ हत्या समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। तहरीर के अनुसार, 7 जुलाई की शाम विशाल गोंड मीट खरीदने खेदन चौराहा स्थित सूरज की दुकान पर गया था, जहां विवाद हो गया। आरोप है कि सूरज के रिश्तेदारों ने विशाल को लाठी-डंडों से मारने का प्रयास किया, लेकिन वह वहां से बचकर निकल गया।


इसके बाद ग्राम प्रधान आशुतोष शंकर सिंह अपने चालक के साथ सूरज को थाने ले गए और विशाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। 8 जुलाई को पुलिसकर्मी सचिन सरोज और अंकित सिंह विशाल के घर पहुंचे और उसके पिता कामजी गोंड (42) को थाने ले गए। विशाल को थाने बुलाने का दबाव बनाने के लिए पुलिसकर्मियों ने कामजी के साथ मारपीट की। इसके बाद ग्राम प्रधान और उसके चालक कामजी को अपने साथ ईंट-भट्ठे पर ले गए, जहां कथित तौर पर उनकी पिटाई कर उन्हें अधमरा कर बगीचे में छोड़ दिया गया। गांव के बच्चों ने कामजी को बेहोशी की हालत में देखा और परिजनों को सूचना दी। परिजन उन्हें रेवती अस्पताल ले गए, जहां से गंभीर हालत में जिला अस्पताल और बाद में वाराणसी ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। उपचार के दौरान 10 जुलाई की रात उनकी मौत हो गई। 

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