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सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ा, सीजेपी की सभी मागें लम्बित

सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ा, सीजेपी की सभी मागें लम्बित
नेशनल डेस्कः
दिल्ली के जंतर मंतर से बड़ी खबर है। मेदांता अस्पताल मे भर्ती सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने 26 वें दिन अपनी भूख हड़ताल तोड़ दी है। उन्होने 28 जून ने अनशन शुरू किया था। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में सोनम वांगचुक ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में जूस पीकर अनशन तोड़ा। सोनम वांगचुक पहले धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे थे।


जेपी नड्डा और जितेन्द्र सिंह की मुलाकात के बाद उन्होंने बिना इस्तीफे के ही अनशन खत्म कर दिया। बड़ा सवाल यह है कि उन्होंने अनशन क्यों खत्म किया? क्या सरकार उनकी सभी मांगें मान गई? क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऐलान ने उनका भरोसा जीता? या फिर कोई और वजह थी ? दरअसल, गुरुवार रात केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह मेदांता अस्पताल पहुंचे. दोनों नेताओं ने सोनम वांगचुक से लंबी बातचीत की। इसके बाद सोनम वांगचुक अनशन खत्म करने के लिए तैयार हो गए। 


उनका कहना था कि नीट पेपर लीक मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होना चाहिए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए मजबूत कानून बनाया जाए। उनका आंदोलन धीरे-धीरे देशभर में चर्चा का विषय बन गया। सीजेपी प्रोटेस्ट देशभर में फैल गया। आज कॉकरोच जनता पार्टी का देशव्यापी प्रदर्शन है. सोनम वांगचुक ने भले ही अनशन खत्म कर दिया, मगर सीजेपी के प्रदर्शनकारी अब भी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अड़े हैं।


सवाल ये भी है कि छात्रों की मागों मे कौन सी मांग मान ली गई। एक महीने से चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री ने भी अपनी चुप्पी तोड़ दी हैं। उन्होने कहा पेपर लीक के गुनहगारों को पकड़ा गया है, वे जेल मे है। फास्ट ट्रैक कोर्ट मे मामले की सुनवाई होगी और कड़ी सजा का प्रबंध होगा। उन्होन पेपर लीक मामले मे संसद मे चर्चा कराने का भी वादा किया है। हैरानी है कि प्रधानमंत्री का ये वक्तव्य छात्रों को लाठियों से पिटवाने और उन पर पैलेट गन चलवाने के बाद आया है। 


यही निर्णय वे पहले भी ले सकते थे। सवाल ये भी है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट देश मे पहले से है, कौन सी कोर्ट ने जल्दी फैसला सुना दिया है, आंकड़े हैरान करने वाले हैं। किसी मामले को लम्बे समय तक उलझाना हो तो उसे कोर्ट मे भेज देना सबसे सफल फितरत है। आखिरी सवाल धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे का क्या हुआ जिसके लिये लाखों की संख्या मे छात्र सड़क पर उतरे और लाठियां खाईं। उन दोषियों का क्या होगा जिन्होने जंतर मंतर पर निहत्थे और निर्दोष छात्रों पर लाठियां बरसाईं, महिलाओं संग बरबरता की। बगैर नेम प्लेट के पुलिस ने छात्रों की पिटाई की, दाढ़ी रखाये हाथों में लोहे की राड लिये नौजवान कौन थे ? इन सवालों का जवाब कौन देगा ?


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