नोयडा मे शराब की दुकान
हटाने के लिये न्यायाधीश को दखल देना पड़ा
गौतम बुद्धनगर संवाददाता (ओ पी श्रीवास्तव)। शराब की बिक्री से प्रदेश एवं केंद्र सरकार को अत्यधिक राजस्व की प्राप्ति होती है और शराब की खपत प्रतिवर्ष बढ़ाए जाने हेतु शासन का दबाव भी रहता है। यही कारण है कि अब गली-गली शराब की दुकानें नजर आने लगी है। लेकिन इन्हीं परिस्थितियों के बीच शराब की एक दुकान को हटाने के लिए एक न्यायाधीश को दखल देना पड़ा है।
न्यायाधीश ने इस संबंध में गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम को पत्र लिखकर अति शीघ्र शराब की दुकान को अन्यत्र हटाने के लिए कहा है। जबकि इस मामले में जिला आबकारी अधिकारी का कहना है कि शासन से दिशा निर्देश प्राप्त होने पर उचित कार्रवाई की जाएगी। मिली जानकारी के अनुसार जिले के किशोर न्यायालय के न्यायिक अधिकारी, मजिस्ट्रेट ने किशोर न्यायालय बिल्डिंग परिसर के 200 मीटर की परिधि के अंदर संचालित होने वाले शराब की दुकान को अन्यत्र हटाने के लिए पत्र प्रेषित किया है।
न्यायिक अधिकारी ने अपने पत्र में कहा है कि नोएडा के थाना फेज 2 के पुराने कोर्ट की बिल्डिंग में किशोर न्यायालय संचालित है और यहीं पर बाल सुधार केंद्र (बच्चों का जेल )भी स्थित है। पत्र में न्यायिक अधिकारी ने इस बात का जिक्र किया है कि पास में ही शराब की दुकान होने से आए दिन शराबियों द्वारा शराब पीकर हुड़दंग किया जाता है जिससे न्यायिक कार्य एवं शांति व्यवस्था में अवरोध उत्पन्न होता है। न्यायिक अधिकारी का यह भी कहना है कि आबकारी नीति के अनुसार स्कूल, मंदिर, अस्पताल आदि के 200 मीटर के परिधि के अंदर शराब की दुकानें संचालित नहीं हो सकती हैं।
लेकिन यहां पर पिछले अनेक वर्षों से शराब की दुकान संचालित हो रही है जो आबकारी नीति का खुला उल्लंघन है। उनका कहना है कि इससे बाल कैदियों के स्वभाव एवं व्यवहार पर भी विपरीत असर पड़ता है। इस मामले में जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि पुरानी कोर्ट की बिल्डिंग में शराब की दुकान पिछले अनेक वर्षों से संचालित हो रही है और अभी भी इस पुरानी जगह पर ही शराब की दुकान स्थित है। नई दुकान नहीं खोली गई है। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी के माध्यम से उनको पत्र प्राप्त हुआ है जिसे शासन में प्रेषित कर दिया गया है। वहां से निर्देश मिलते ही उचित कार्रवाई की जाएगी।












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