जंतर मंतर का आन्दोलन खत्म नही हुआ,
संसद परिसर मे धरने पर बैठे सांसद चन्द्रशेखर
संवाददाता, दिल्ली एनसीआर। जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ हुए लाठीचार्ज के विरोध में, भारी बारिश के बीच नगीना के सांसद चन्द्रशेखर आज़ाद संसद परिसर में धरने पर बैठे हैं। हैरानी इस बात की है कि इस मुद्दे पर समूचा विपक्ष चुप्पी साधे है। अगर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध कर रहे छात्रों के साथ हुई कार्रवाई पर संसद में जवाबदेही नहीं तय होगी, तो इससे सरकार की कार्यशैली पर और गंभीर सवाल उठेंगे। अपनी पार्टी के अकेले सांसद होने के बावजूद चन्द्रशेखर आज़ाद इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रख रहे हैं। लोकतंत्र में सत्ता से सवाल पूछना और जनता के मुद्दों को उठाना विपक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
दरअसल देश की जनता को लग रहा है कि सोनम वांगचुक का अनशन बेनतीजा रहा और लोग उहापोह मे है कि आखिर फैसला क्या हुआ। आन्दोलन खत्म हो गया या फिर अब इससे बड़ा आन्दोलन होगा। चन्द्रशेखर आजाद ने धरना शुरू कर यही संदेश देने की कोशिश किया है कि न मुद्दा खत्म हुआ है और न ये आन्दोलन। एक्स पर पोस्ट करके चन्द्रशेखर ने अपना उद्गार व्यक्त किया है। आइे जानते हैं अपने संदेश मे सांसद ने क्या लिखा है।
‘‘ देश के हर युवा साथी को भरोसा दिलाता हूँ कि न यह मुद्दा खत्म हुआ है और न ही यह आंदोलन। आपका भाई हर कीमत पर आपके साथ खड़ा है। संसद से लेकर सड़क तक, इस लड़ाई को पूरी जिम्मेदारी, पूरी मजबूती और पूरी प्रतिबद्धता के साथ पहले भी लड़ी है और आगे भी पूरी ताकत के साथ लड़ूँगा। मैं केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि आपका भाई हूँ। आपके अधिकार, सम्मान और भविष्य की इस लड़ाई में आख़रि दम तक आपके साथ रहूँगा।
साथ ही मैं दिल्ली पुलिस से भी अपील करता हूँ कि इन मासूम, पढ़ने-लिखने वाले युवाओं पर लाठियाँ चलाकर अपनी वर्दी को दागदार न करें। ये बच्चे भी इसी देश के भविष्य हैं और किसी न किसी पुलिसकर्मी, किसान, मजदूर या आम परिवार के घर से ही निकले हैं। स्थिति को संवेदनशीलता, धैर्य और कानून के दायरे में रहकर संभालिए। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। वार्ता के बजाय दमन का रास्ता अपनाने से बात बनती नहीं, बल्कि बिगड़ती है।
मैं सभी युवा साथियों से भी अपील करता हूँ कि हर परिस्थिति में शांति, संयम और अनुशासन बनाए रखें। किसी भी उकसावे या अफवाह में न आएँ। हमारी सबसे बड़ी ताकत हमारी एकता, हमारा लोकतांत्रिक संघर्ष और संविधान पर हमारा विश्वास है। हम लड़ेंगे, डटकर लड़ेंगे, लेकिन संविधान और लोकतंत्र के रास्ते पर चलकर अपने अधिकार लेकर रहेंगे। जय भीम! जय संविधान! आप चन्द्रशेखर आजाद की भावनाओं को समझ सकते हैं, काश! विपक्ष भी एकजुट होकर उन्ही की राह पर होता तो सरकार के कान मे जूं रेंगता और बच्चों को न्याय मिल पाता।











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