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सैकड़ों मासूम बच्चों ने दूसरी बार घेरा डीएम आफिस, कहा स्कूल की सड़क बनवा दो

सैकड़ों मासूम बच्चों ने दूसरी
बार घेरा डीएम आफिस, कहा स्कूल की सड़क बनवा दो

यूपी डेस्कः
जंतर मंतर पर हुये आन्दोलन के बाद देश की राजनीति और युवाओं की सोच बड़ी तेजी से बदल रही है। अफसरों के मन मस्तिष्क पर आन्दोलन का एक खौफ आज भी कायम है। जंतर मंतर के आन्दोलन ने सिर्फ जेन जेड का ही नही जागरूक किया है, बल्कि जेल अल्फा भी जागरूक हुआ है और जेन जेड की ही तर्ज पर अपनी आवाज बुलंद कर रहा है। 


यूपी के फतेहपुर के बाद अब हमीरपुर जिले से मामला सामने आया है। हमीरपुर में जेन अल्फा ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट का घेराव किया, अचानक दर्जनों की संख्या मे स्कूली बच्चे डीएम आफिस पहुंच गये और स्कूल जाने वाली सड़क के मरक्कत की मांग करने लगे। बच्चे अपनी मांगें डीएम के सामने रखना चाहते थे लेकिन उन्हें रोक दिया गया। मासूम बच्चों के अचानक कलेक्ट्रेट पहुंचने से भयभीत डीएम पिछले दरवाजे से भाग लिये। उनके भीतर बच्चों के सवालों का सामना करने का साहस नही था। पांच घंटे तक चले हंगामे के बाद मायूस बच्चे घर लौट गए।


मंगलवार को मनकी-हमीरपुर मार्ग के निर्माण के लिए चंदूपुर और आसपास के कई गांवों के स्कूली बच्चों ने कलक्ट्रेट की ओर कूच कर दिया। अफसरों ने उन्हें गोल चबूतरा पर प्रदर्शन करने के लिए कहा। बच्चे मान गए और डीएम को बुलाने की मांग की। अधिकारियों ने पांच बच्चों को वार्ता के लिए बुलाया लेकिन डीएम अभिषेक गोयल नहीं मिले। इससे बच्चे भड़क उठे और डीएम दफ्तर की ओर बढ़ने लगे। पुलिस-पीएसी ने उन्हें बलपूर्वक रोक लिया। 


कुछ बच्चे डीएम दफ्तर पहुंचे लेकिन उन्हें वहां से निकाल दिया गया। कुछ बच्चों के साथ मौके पर तैनात पुलिस इंसपेक्टर ने बदतमीजी की और उन्हे जानवरों की तरह हट हट करके दुतकारा। आप अंदाजा लगा सकते हैं मासूम बच्चों के साथ भी जो पुलिसकर्मी बदसलूकी कर सकता है वह पुलिस की वर्दी के लिये कितना डिजर्ब करता है। बच्चों को एडीएम राकेश कुमार ने समझाने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने एक न सुनी। डीएम के चले जाने की सूचना पर बच्चे भी लौट गए। 


हमीरपुर में कीचड़ बन चुकी मनकी-हमीरपुर सड़क की कुल लंबाई करीब डेढ़ किमी होगी। दलदल बन चुकी इस दलदली को पार करके चंदूपुर और आस-पास के गांवों के सैकड़ों बच्चों को स्कूल जाना पड़ता है। बच्चे बस इसी सड़क को बनवाने के लिए 40 दिन में दूसरी बार चार किमी पैदल चल कर कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उम्मीद थी कि डीएम उनकी बात सुनेंगे और सड़क बन जाएगी। लेकिन अफसोस ऐसा न हो सका। डीएम सर उनसे मिले बगैर ही निकल गए। इससे पहले तीन जुलाई को भी बच्चों ने प्रदर्शन किया था। 


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