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सिटी हॉपिटल के डा. एम.खान ने 10 घण्टे की सर्जरी के बाद युवक को दिया नया जीवन

सिटी हॉपिटल के डा. एम.खान ने 10 घण्टे की सर्जरी के बाद युवक को दिया नया जीवन Dr. M. Khan of City Hospital gave new life to the young man after 10 hours of surgery.

32 साल से कुछ खा नही पाता था फैजान
हॉस्पिटल से डिस्चार्ज होते समय खाई बिरयानी
दुर्लभ सर्जरी से बन रही डा. एम.खान की पहचान




बस्ती, 02 अक्टूबर (जीशान हैदर रिज़वी)। कहते हैं डाक्टर धरती पर भगवान का दूसरा रूप है। इसकी बानगी भी समय समय देखने को मिलती है तो इस कहावत को आधार मिल जाता है। बस्ती में भी एक ऐसा मामला सामने आया है जिसके बारे में सुनकर एक बार फिर यकीन होता है वाकई डाक्टर धरती पर भगवान का दूसरा रूप है। बदलते परिवेश और कामर्शियल हो चुकी दुनिया में यहां एक बात कहना जरूरी है कि चिकित्सा पेशे में यदि दया और सेवा भावना नही है तो ऐसे किसी भी व्यक्ति को डाक्टर के किरदार में नही होना चाहिये। 


हम जिक्र करना चाहेंगे बस्ती शहर के दक्षिण दरवाजा चौराहे पर स्थित सिटी हॉस्पिटल की, जहां सेवायें दे रहे डा. मुस्अब खान (डा. एम.खान एम.डी.एस.) ने 32-35 साल के एक युवक की दुर्लभ सर्जरी कर उसको नया जीवन दिया है। डुमरियागंज के बेवा निवासी फैजान जब 3 साल का था तो उसे मुंह, जबड़ा और सिर में गंभीर चोट लगी थी। चोट रिकवर हो गया लेकिन इलाज महंगा होने के नाते वह बड़े अस्पतालों में नही जा पाया। नतीजा ये हुआ कि उसके जबड़े की हड्डी ग्रोथ कर सिर के हिस्से में जाकर जुड़ गई, धीरे धीरे उसका मुंह खुलना बंद हो गया। 



करीब 32 साल से उसने ठोस आहार कुछ भी नही लिया। लिक्विड अथवा भोजन का पेस्ट बनाकर बनाकर बंद कमरे में एकांत में वह अपनी उंगलियों से मुश्किल से मुंह में कुछ डाल पाता था। वह अपने किसी मरीज को दिखाने सिटी हॉस्पिटल पहुंचा था। उसी दौरान उसकी मुलाकात डा. एम. खान से हुई। उन्होने उसके साथ वालों से पूरी जानकारी ली। कहा तुम्हे तो इलाज की जरूरत है। तुम ठीक हो सकते हैं। फैजान ने कहा हमारे पास पैसा नही है। फिलहाल उसने किसी तरह कुछ पैसों का बंदोबस्त किया और डा. एम.खान के पास पहुंच गया। 



डाक्टर ने बहुत कम खर्च में उसके जबड़ों की सर्जरी की, जो सफल रही। करीब 10 घण्टे की सर्जरी के बाद डाक्टर को भी अहसास हुआ कि फैजान वाकई अब कुछ खा पायेगा। एक हफ्ते की देखरेख के बाद उसे जिस दिन अस्पताल से छुट्टी दी गई, डाक्टर ने पूछा कुछ खाना चाहते हो, उसने बिरयानी खाने की इच्छा जाहिर की और अपने हाथों से बिरयानी खाया। बस्ती जैसी छोटी जगह पर कम खर्च में इतना दुर्लभ आपरेशन वही करेगा जिसके भीतर सेवाभाव होगा। फिलहाल फैजान अब थोड़ा थोड़ा बोलने लगा है, और अपने पसंद की चीजें खा रहा है। डाक्टर ने कहा अभी इसमे और सुधार आयेगा। फैजान के जानने वालों ने डाक्टर को धन्यवाद दिया है। फैजान क्यों न कहे डाक्टर को धरती का भगवान ?


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