बुजुर्गों के लिये ही नही युवाओं के लिये भी फिजियोथिरेपी जरूरी- डा. अजय Physiotherapy is important not only for the elderly but also for the youth – Dr. Ajay
मीडिया दस्तक (हेल्थ डेस्क) फिजियोथेरेपी एक ऐसा इलाज है, जो बिना किसी दवा या ऑपरेशन के, शरीर के दर्द व चोट को ठीक कर सकता है। यह बातें फिजियोथिरेपिस्ट डा. अजय श्रीवास्तव ने कहा फिजियोथेरेपी बढ़ती उम्र और पैरालिसिस में ज्यादा मददगार होती है। उन्होने आगे कहा यह केवल बुज़ुर्गों के लिए ही नहीं बल्कि छात्रों, प्रोफेशनल्स, खिलाड़ियों, महिलाओं और गृहिणियों सभी के लिए लाभकारी है। ऑफिस वर्कर्स को घंटों डेस्क पर बैठना पड़ता है।
ऐसे में पीठ व गर्दन दर्द बढ़ जाता है, एक्सरसाइज़ से रोका जा सकता है। खिलाड़ियों को अक्सर चोट लग जाती है, फिजियोथिरेपी मसल्स कंडीशनिंग और चोटों की रिकवरी में मददगार होती है। इससे जोड़ों में लचीलापन आता है जिसने बढ़ती उम्र के साथ चलने फिरने में कोई परेशानी नही होती है। वहीं महिलाओं को गर्भावस्था, डिलीवरी के बाद रिकवरी और पेल्विक फ्लोर को मज़बूत करने में फिजियोथिरेपी सहायक होती है। ऑफिस वर्कर्स को चाहिये कि हर 20 मिनट पर 20 फीट दूर देखें और 20 सेकंड तक आँखों को आराम दें।
साथ ही पीठ सीधी करके खड़े हों और कंधे घुमाएँ। गर्दन को धीरे-धीरे एक कंधे की ओर झुकाएँ और 10 सेकंड तक रोकें। इसे तीन बार कम से कम दोहरायें। पीठ के बल लेटें, घुटने मोड़ें। पेट की मांसपेशियों को कसें और पीठ को फर्श से लगाएँ। 5 सेकंड तक रोकें। बुजुर्गों को चाहिये कि वे कुर्सी पकड़कर एक पैर को ज़मीन से थोड़ा ऊपर उठाएँ और 10 सेकंड तक रोकें। गहरी सांस लें, पेट बाहर आए और धीरे-धीरे छोड़ें। इससे तनाव कम होगा और फेफड़े मज़बूत होंगे।
डा. अजय श्रीवास्तव का कहना है कि फिजियोथेरेपी केवल इलाज नहीं बल्कि हमारे जीवनशैली का हिस्सा है। यदि हम रोज़मर्रा की दिनचर्या में कुछ मिनट स्ट्रेचिंग, पॉश्चर सुधार और सांस लेने की तकनीक शामिल कर लें, तो जीवन भर दर्द और बीमारियों से बचाव संभव है। फिजियोथैरेपी न केवल शारीरिक रूप से मजबूत करती है बल्कि मेंटल हेल्थ को भी दुरुस्त रखती है। अगर आप लंबे समय से किसी भी शारीरिक दर्द, चलने फिरने में परेशानी जैसी समस्या से जूझ रहे हैं,तो थेरेपिस्ट से जरूर मिलें। शुरुआती देखभाल से बड़ी बीमारी को रोका जा सकता है।














Post a Comment
0 Comments