यूनिवर्सिटी की अजीबोगरीब डिमांड, मासिक धर्म की छुट्टी के लिए मांगी यूज़्ड सैनिटरी पैड की फोटो
University's strange demand, photos of used sanitary pads asked for menstrual leave
नेशनल डेस्कः हरियाणा के रोहतक स्थित महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी में तीन महिला सफाई कर्मचारियों को मासिक धर्म की छुट्टी लेने के लिए इस्तेमाल किए हुए सैनिटरी पैड की फोटो व्हाट्सएप पर भेजने के लिए मजबूर किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे “शर्मनाक, अमानवीय और बुनियादी मानवीय गरिमा का उल्लंघन” बताया।
सुप्रीम कोर्ट ने मासिक धर्म से जुड़े अपमानजनक व्यवहार यानी पीरियड शेमिंग को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने महिलाओं और लड़कियों की गरिमा, निजता और स्वास्थ्य अधिकारों की रक्षा के लिए पूरे देश में बाध्यकारी दिशा-निर्देश (गाइडलाइन) बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इस मुद्दे पर कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब भी तलब किया है। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की अवकाशकालीन बेंच ने इस व्यवहार पर गहरी नाराजगी जताई।
कोर्ट ने कहा, “अगर कोई महिला मासिक धर्म में है और भारी काम नहीं कर सकती, तो काम किसी और कर्मचारी को दे दिया जाए। इस तरह की घिनौनी जांच की क्या आवश्यकता है?” बेंच ने कहा कि ऐसे मामले समाज की पिछड़ी और अपमानजनक मानसिकता को उजागर करते हैं। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। याचिका में मांग की गई है कि देशभर में एकसमान और बाध्यकारी गाइडलाइन बने।
स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल, कारखानों और कार्यस्थलों पर पीरियड जांच के नाम पर महिलाओं को अपमानित करने की प्रथा खत्म हो, महिलाओं के मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो। याचिका में बताया गया कि हरियाणा की घटना कोई अकेला मामला नहीं है। देश के कई राज्यों में, खासकर असंगठित क्षेत्रों की महिला कर्मचारियों के साथ इस तरह की अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। दो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है।







































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