मीडिया दस्तक न्यूज के डायरेक्टर, संपादक अशोक श्रीवास्तव पर सेवानिवृत्त शिक्षक रामसजन यादव की रचना
कलम के सिपाही श्री अशोक श्रीवास्तव सर,
डायरेक्टर, मीडिया दस्तक न्यूज के सम्मान में
पत्रकारिता, समाजसेवा एवं जन्मदिन पर
वृहद वृक्षारोपण को समर्पित कविता
कलम को शस्त्र बना, सत्य को ढाल किए,
खड़े हैं रणभूमि में, निर्भीक मशाल लिए।
न बिके, न झुके कभी, न मौन की चादर ओढ़े,
अशोक श्रीवास्तव न्याय के पहरेदार सधे।
जब सत्ता की आँधी आई, सच को रौंदने को,
तब शब्द बने सिंहनाद, भय को तोड़ने को।
मीडिया दस्तक की गूँज, जन जन तक पहुँची,
अंधेरों के सीने में, रोशनी बनकर बरसी।
कलम के संग कर्म जुड़ा, सेवा बनी पहचान,
पीड़ित के हर आँसू में, दिखता उनका मान।
भूखे को भोजन मिले, असहाय को सहारा,
समाजसेवा के पथ पर, उनकी जीवन धारा।
धरती जब कराह उठी, कटते वन, सूखती धारा,
तब वे बने प्रहरी, हरियाली के सहारा।
पर्यावरण प्रेमी बन, दिया सशक्त संदेश,
प्रकृति संरक्षण ही है, सच्चा राष्ट्र उद्देश्य।
जन्मदिन पर दीप नहीं, वृक्ष लगाते हैं,
धरा को उपहार दे, जीवन बचाते हैं।
हजारों पौधों संग, आशा का उत्सव मना,
हर पौधा बोले यही सच्चा जन्मदिन बना।
छाया देंगे ये पौधे, आने वाली पीढ़ी को,
शुद्ध हवा, शीतलता, मानवता की सीढ़ी को।
केक नहीं, हरियाली, उनका उत्सव विधान,
सेवा, सत्य, प्रकृति यही उनका सम्मान।
न यश की लालसा, न सत्ता का अभिमान,
लोकहित ही साध्य रहा, यही उनका अरमान।
हर खबर में जन चिंतन, हर कर्म में प्रकाश,
लोकतंत्र की जड़ों में, भरते नूतन विश्वास।
वीर नहीं वे तलवार से, वीर हैं विचारों से,
झूठ के महल ढहाते हैं, सच के प्रहारों से।
शब्दों की सेना लेकर, लड़े अडिग हर मोर्चे पर
कलम के सिपाही हैं, जन गण मन के भरोसे पर।
नमन करता हूं, कलम के इस सेनानी को,
समाज, सत्य, प्रकृति, तीनों के अभिमानी को।
युग-युग तक गूँजेगा नाम, सेवा-हरियाली काल का
अशोक श्रीवास्तव, प्रतीक हैं निर्भीक सवाल का।
रचनाकार- राम सजन गुरू जी
सेवानिवृत्त शिक्षक
पीएमश्री मॉडल प्राथमिक विद्यालय-मुसहा प्रथम-बस्ती
मो.न. 7007259802













Post a Comment
0 Comments