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मध्य प्रदेश में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विरोध में घण्टा लेकर सड़क पर उतरे कांग्रेसी



मध्य प्रदेश में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के विरोध में
घण्टा लेकर सड़क पर उतरे कांग्रेसी

नेशनल डेस्कः
मध्य प्रदेश की सड़कों पर घण्टा गूंज रहा है। ये कोई साधारण घण्टा नही है, अभी तक भाजपा के घण्टीबाज नेता की चर्चा देशभर मे होती थी, अब घण्टाबाज मंत्री चर्चा मे हैं। हम बात कर रहे हैं वरिष्ठ भाजपा नेता और मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की। एक बार फिर वे अपने विवादित बयान को लेकर मीडिया, जनता और विपक्ष के टारगेट पर हैं। 



दरअसल मध्य प्रदेश के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत हुई है। ताजा मामला, इंदौर में दूषित जल से लोगों की मौत पर एक टीवी पत्रकार द्वारा पूछे गये तीखे सवाल से जुड़ा है. जिसपर कैलाश विजयवर्गीय ने ना सिर्फ अपना आपा खोया, बल्कि कैमरे पर आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल भी किया। इसके बाद कांग्रेस पार्टी सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रही है। 


आइये जानते हैं कैलाश विजयवर्गीय ने ऐसा क्या कह दिया कि मध्य प्रदेश की राजनीति अचानक गरम हो गई। वायरल वीडियो में पत्रकार के सवाल पर वे कहते हुये सुनाई दे रहे, है “छोड़ो यार, फोकट का प्रश्न मत पूछो.” इसके बाद उन्होंने ‘घण्टा’ शब्द का इस्तेमाल किया। इससे पहले उन्होंने यह भी कह दिया था कि कुछ मौतें ‘नेचुरल’ हैं. जब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और आलोचना शुरू हुई, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि थकान और दुख के कारण गलत शब्द निकल गए थे। आप अंदाजा लगा सकते हैं 15 लोगों की मौत पर इस तरह बेहूदा जवाब देने वाला नेता जनहित के सवालों पर भला कितना गंभीर होगा।


वैसे यह कोई पहला मामला नही है जब कैलाश विजयवर्गीय के बयान को लेकर बवाल हो रहा है। इससे पहले भी वे विवादित बयानों से पार्टी को असहज करते रहे हैं। भारत के स्वतंत्रता दिवस पर, आस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेटरों के साथ छेड़छाड़ मामले मे, महिलाओं के खराब या छोटे कपड़े पहनने पर दुष्कर्म की घटनाओं पर तथा ताजमहल पर विवादित टिप्पणियां कर कई बार निशाने पर आ चुके हैं। जानकारी मिली है कि 25 दिसंबर को स्थानीय लोगों ने पानी में अजीब सी बदबू और गंदगी की शिकायत की थी। लेकिन सुनवाई नहीं हुई। 


जांच में पता चला कि पानी की मेन पाइपलाइन में लीकेज था, और ऊपर बने एक शौचालय का गंदा पानी सीधे सप्लाई में मिल गया। लैब रिपोर्ट्स ने कन्फर्म किया है कि पानी में वो बैक्टीरिया पाये गये हैं जो आमतौर पर सीवर और मानव अपशिष्ट में पाए जाते हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हर मृतक के परिवार को 2 लाख रुपये की सहायता और सभी मरीजों का मुफ्त इलाज घोषित किया। लीकेज ठीक करने, पाइपलाइन साफ करने और नई लाइन बिछाने का काम तेजी से चल रहा है। कुछ अधिकारियों को सस्पेंड भी किया गया है। यहां बताना जरूरी है कि वार्षिक स्वच्छता सर्वेक्षण में इंदौर भारत के सबसे स्वच्छ शहरों मे शुमार है और उसे लगातार 8वीं बार इस खिताब से नवाजा गया है। महामहिम राष्ट्रपति द्वारा विजेता शहरों को सम्मानित किया जा चुका है। 


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