कैलेंडर में सीएम की फोटो न छपने पर ओएसडी को मिली सजा
गौतम बुद्धनगर संवाददाता (ओपी श्रीवास्तव) नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के वार्षिक कैलेंडर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की फोटो न छपने पर नोएडा प्राधिकरण में तैनात चर्चित ओ एस डी महेंद्र प्रसाद को जिम्मेदार मानते हुए उन्हे पहले नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन से शनिवार को हटाया गया और फिर नोएडा प्राधिकरण से भी हटाकर उन्हें लखनऊ अटैच कर दिया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, कैलेंडर में सीएम की फोटो न छपना महज औपचारिक चूक नहीं माना गया, बल्कि सरकारी मर्यादा, अनुशासन और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए तत्काल कार्रवाई की गई। उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के वर्ष 2026 के कैलेंडर ने नोएडा की अफसरशाही में हलचल पैदा कर दी थी। आरोप है कि कैलेंडर में नोएडा प्राधिकरण के सीईओ लोकेश एम की तस्वीर बिना औपचारिक अनुमति प्रकाशित की गई, जबकि उसी प्रकाशन में महेंद्र प्रसाद की तस्वीर को भी प्रमुख स्थान दिया गया।
बताया जाता है कि मामला सामने आते ही नोएडा में जवाबदेही तय करने की कवायद तेज हो गई। हालात की गंभीरता को देखते हुए सीईओ लोकेश एम ने तत्काल कदम उठाते हुए महेंद्र प्रसाद को एनएमआरसी के कार्यकारी निदेशक पद से हटा दिया। इसके बाद लखनऊ के उच्च प्रशासन ने सख्ती और बढ़ाते हुए उन्हें नोएडा प्राधिकरण से भी हटाकर लखनऊ स्थित मुख्यालय अटैच कर दिया। प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को साफ तौर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और एक कड़ा संदेश माना जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम ने नोएडा में राजनीतिक हलकों में कई असहज सवाल खड़े कर दिए हैं। जब सरकारी कैलेंडरों में परंपरानुसार मुख्यमंत्री की तस्वीर को स्थान दिया जाता है, तो इस बार वह तस्वीर नदारद क्यों रही? अगर परंपरा से हटकर मुख्यमंत्री की फोटो नहीं लगाई गई, तो फिर अधिकारियों की तस्वीरें इतनी प्रमुखता से किस प्रक्रिया और किसकी अनुमति के आधार पर छापी गईं?
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह मामला केवल डिजाइन या छपाई की “तकनीकी चूक” नहीं, बल्कि सरकारी शिष्टाचार, संस्थागत मर्यादा, जवाबदेही और अनुमति-प्रक्रिया से जुड़ा संवेदनशील प्रकरण है। सूत्र बताते हैं कि इस मुद्दे पर ऊपरी स्तर पर नाराजगी दर्ज की गई, जिसके बाद महेंद्र प्रसाद को लखनऊ मुख्यालय अटैच करने की कार्रवाई को उसी सख्ती का संकेत माना जा रहा है। यह भी कहा जाता है ओ एस डी महेंद्र प्रसाद ने नोएडा प्राधिकरण के कुछ ठेकेदारो के पक्ष में अनेक विधि विरुद्ध निर्णय लिया था। जिससे वो मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉक्टर लोकेश एम की आंखों धस गए थे। जिसकी जानकारी मुख्यमंत्री को भी था। और जैसे ही उनको मौका मिला ससम्मान प्राधिकरण से रुखसत कर दिया गया।















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