I.A.S. कृष्णा करूणेश को मिली नोयडा की जिम्मेदारी
गौतमबुद्ध नगर, संवाददाता (ओ पी श्रीवास्तव)। नोएडा प्राधिकरण के पूर्व सीईओ डॉ लोकेश एम के तबादले के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा प्राधिकरण की कमान 2011 बैच के आईएएस कृष्णा करुणेश को सौपीं है। इससे पहले वह नोएडा प्राधिकरण में अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी के रूप में केवल छह महीने से जिम्मेदारी निभा रहे थे। युवराज मेहता की मौत के मामले के बाद तत्कालीन सीईओ डॉक्टर लोकेश एम को पद से हटाए जाने के बाद यह नियुक्ति नोएडा प्रशासनिक व्यवस्था में नेतृत्व परिवर्तन के तौर पर देखी जा रही है।
नोएडा शहर में सड़क सुरक्षा, त्वरित रेस्क्यू और जवाबदेही तय करने को लेकर चल रही बहस के बीच नोएडा अथॉरिटी को नया चेहरा मिला है। उल्लेखनीय है कि नोएडा में युवराज मेहता की मौत के बाद से प्रशासनिक निर्णयों में देरी, इमरजेंसी रिस्पॉन्स और सिस्टम की तैयारियों पर सवाल खड़े हुए। ऐसे में नोएडा प्राधिकरण के नेतृत्व में बदलाव को संदेश साफ माना जा रहा है कि प्राधिकरण अब फील्ड-लेवल पर सुधार और कड़ी मॉनिटरिंग की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।
नोएडा प्राधिकरण के नए मुख्य कार्यपालक अधिकारी के तौर पर आईएएस कृष्णा करुणेश के सामने चुनौती होगी कि नोएडा में सड़क सुरक्षा, शिकायत निस्तारण और परियोजनाओं की निगरानी को लेकर प्राधिकरण की कार्यशैली में ठोस बदलाव दिखे। मूल रूप से बिहार के रहने वाले कृष्णा करुणेश का प्रशासनिक सफर उत्तर प्रदेश के कई अहम जिलों से होकर गुजरा है। यही वजह है कि नोएडा जैसे तेजी से बढ़ते शहर में उनकी तैनाती को व्यवस्था सुधार, अनुशासन और तेज निर्णय क्षमता से जोड़कर देखा जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि कृष्णा करूणेश मुख्यमंत्री के चहेते हैं।
वैसे अब तक की तैनाती में वह गोरखपुर में जिलाधिकारी, कुशीनगर में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, गाजियाबाद में एसडीएम और सीडीओ जैसी जिम्मेदार भूमिकाओं में रहे हैं, जबकि हापुड़ और बलरामपुर में भी जिला स्तर पर प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। आईएएस कृष्णा करुणेश की छवि एक ऐसे अफसर की रही है जो लापरवाही पर कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटते। 2022 में गोरखपुर के क्ड रहते हुए उन्होंने काम में ढिलाई बरतने वाले 9 लेखपालों को एक साथ निलंबित कर प्रशासनिक गलियारों में साफ संदेश दिया था कि जिम्मेदारी तय होगी और जवाब भी देना पड़ेगा।
इसी वजह से उन्हें एक्शन-ओरिएंटेड, तेज-तर्रार और परिणाम देने वाले अधिकारियों की श्रेणी में रखा जाता है शैक्षणिक स्तर पर भी उनका प्रोफाइल मजबूत माना जाता है। उन्होंने पोस्ट ग्रेजुएशन के साथ एलएलबी की डिग्री भी हासिल की है। नोएडा जैसे शहर में, जहां शहरी विकास, नियम-कानून, परियोजनाओं की निगरानी और जवाबदेही बड़े मुद्दे रहते हैं, यह बैकग्राउंड उनके फैसलों को प्रशासनिक मजबूती देने वाला माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री के अति करीबी होने के नाते मुख्य कार्यपालक अधिकारी को नोएडा प्राधिकरण से सम्बंधित मामलों के निर्णयो को लेने में अब किसी प्रकार की दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा।












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