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एलपीजी संकट कायम, गैस एजेंसियों पर लम्बी लाइनों पर सवाल



एलपीजी संकट कायम, गैस एजेंसियों पर लम्बी लाइनों पर सवाल
बस्ती, 17 मार्च।
जनपद में एलपीजी गैस की उपलब्धता को लेकर जिला प्रशासन द्वारा बार-बार यह दावा किया जा रहा है कि कहीं भी गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल उलट नजर आ रही है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक गैस एजेंसियों पर लंबी-लंबी कतारें आम हो गई हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


इसी बीच कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिन्होंने प्रशासन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां एक गरीब महिला, जो घरों में चौका-बर्तन कर अपने परिवार का भरण-पोषण करती है, उसे गैस के अभाव में चूरा-भूजा खाकर दिन गुजारना पड़ा, वहीं दूसरी ओर गैस सिलेंडर लेने के लिए लाइन में लगे एक बुजुर्ग व्यक्ति की अचानक तबीयत बिगड़ गई और उन्हें चक्कर आ गया। इन घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि समस्या केवल अफवाह नहीं, बल्कि वास्तविक संकट का रूप ले चुकी है।


इस पूरे मुद्दे पर उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल के जिलाध्यक्ष सुनील सिंह और नगर उपाध्यक्ष इरफान खान ने जिला प्रशासन पर तीखा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि यदि वास्तव में गैस की कोई कमी नहीं है, तो फिर एजेंसियों पर इतनी लंबी कतारें क्यों लग रही हैं? लोगों को घंटों लाइन में खड़े रहने के बावजूद सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है, जो प्रशासनिक दावों की पोल खोल रहा है। व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई पूरी तरह से ठप हो चुकी है। छोटे और मध्यम वर्ग के व्यापारी, मजदूर, छात्र जो हॉस्टल आदि में रहकर पढ़ाई करते है। 


जिनका कारोबार गैस पर निर्भर है, वे गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। होटल, ढाबा और अन्य खाद्य व्यवसाय संचालित करने वाले लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन को केवल बयान देने के बजाय जमीनी स्तर पर स्थिति का आकलन करना चाहिए और तत्काल प्रभाव से आपूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करना चाहिए। साथ ही, गैस की कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, क्योंकि यही लोग कृत्रिम संकट पैदा कर रहे हैं और आम जनता को परेशान कर रहे हैं। 


व्यापार मंडल ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो संगठन को आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि बहुत जल्द व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक सदस्यता अभियान भी चलाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों को संगठन से जोड़ा जा सके और उनकी समस्याओं को मजबूती से उठाया जा सके। फिलहाल बस्ती में गैस संकट को लेकर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। एक तरफ प्रशासन अपने दावों पर कायम है, तो दूसरी ओर आम जनता और व्यापारी वर्ग की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस समस्या का समाधान किस तरह और कितनी जल्दी कर पाता है।

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