सिद्धार्थनगर मे रस्सी के सहारे बंद हो रहे एम्बुलेंस के दरवाजे,
सिस्टम को उंगलियों पर नचा रहे घोटालेबाज
सिद्धार्थ नगर, ब्यूरो (अवधेश मिश्र) सिद्धार्थनगर सहित उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों से एम्बुलेंस सेवा के नाम पर फर्जी काल के जरिये सरकार को लाखों रूपये का चूना लगाया जा रहा है। इस फर्जीवाड़े को इस तरह अंजाम दिया जा रहा है कि कोई सोच भी नही सकता कि मरीजों को अस्पताल पहुचाने के नाम पर सरकार और सिस्टम के साथ कितना बड़ा धोखा किया जा रहा है। संवाददाता ने इस पूरे मामले का पोस्टमार्टम किया तो शर्मनाम सच सामने आया।
सिद्धार्थनगर जिले मे भी कमोवेश यही हाल है। खुनियांव ब्लाक में 108-102 एंबुलेंस सेवा इस तरह बदहाल हो चुकी है कि एम्बुलेंस के दरवाजे रस्सी से बंद हो रहे हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुनियांव में मरीजों को त्वरित सेवा देने वाली जीवीके एमआरआई कंपनी द्वारा संचालित 108 और 102 एंबुलेंस सेवा खुद वेंटिलेटर पर है। पीएचसी में खड़ी एंबुलेंसों का जायजा लिया गया तो चौंकाने वाले हालात सामने आये। एंबुलेंस में लगी एसी और पंखे खराब पड़े मिले। स्ट्रेचर की हालत जर्जर थी और पिछला दरवाजा रस्सी के सहारे बांधकर बंद किया जा रहा था।
मौके पर तीन एंबुलेंस खड़ी थीं, लेकिन उन पर तैनात कर्मचारियों की संख्या महज पांच थी। इनमें तीन ईएमटी और दो पायलट शामिल थे। नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया कि नियमानुसार तीन गाड़ियों पर 12 कर्मचारियों की तैनाती होनी चाहिए। पायलटों की कमी के चलते ईएमटी को ही गाड़ी चलानी पड़ रही है तथा घटना दुर्घटना होने पर जिम्मेदारी भी स्वयं की होती है 12 घंटे की शिफ्ट के बजाय कर्मचारियों से 15-15 दिन लगातार ड्यूटी ली जा रही है। टीम को जांच के दौरान 102 एंबुलेंस में दिसंबर 2025 का डीबीआर रजिस्टर मिला।
रजिस्टर में दर्ज मोबाइल नंबरों पर जब टीम ने संपर्क किया तो फर्जीवाड़ा सामने आया। पहले नंबर पर बात करने वाले ने खुद को ऊंचाहार, रायबरेली का बताया और एंबुलेंस सेवा न लेने की बात कही। दूसरे नंबर की महिला बस्ती की निकली और बोली कि यह उसके भाई का नंबर है, सेवा ली या नहीं, पता नहीं। तीसरे नंबर की महिला ने साफ कहा कि उसने कभी एंबुलेंस सेवा नहीं ली। चौथे नंबर पर बात करने वाली इटवा की महिला ने बताया कि उसके बेटे ने गलती से नंबर डायल कर दिया था।
जीवीके ईएमआरआई कंपनी के कर्मचारी कागजों में फर्जी एंट्री कर मरीजों को लाभ दिखा रहे हैं और सरकारी धन का दुरुपयोग कर रहे हैं। एक कर्मचारी ने दबी जुबान में कहा कि यदि पूरे जिले में पीसीआर और डीबीआर रजिस्टर की जांच हो तो बड़े पैमाने पर फर्जी केस सामने आएंगे। इसमें नीचे से ऊपर तक के अधिकारियों की संलिप्तता उजागर हो सकती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि फर्जी केसों के कारण असली जरूरतमंदों को सेवा नहीं मिल पा रही है। लोगों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। यदि फर्जी केस की बात सामने आती है तो जांच कराकर सख्त कार्रवाई की जाएगी- डॉ. रजत चौरसिया, सीएमओ, सिद्धार्थनगर। डीबीआर रजिस्टर पुराना है, इसलिए मैं उस पर अभी कुछ नहीं कह सकता। आपके द्वारा बताए गए बिंदुओं की मैं स्वयं जांच करूंगा- श्रेयांश श्रीवास्तव, प्रोग्राम मैनेजर 108/102, सिद्धार्थनगर। ऐसे मामले बस्ती जिले मे भी सामने आने आने की संभावना है। आप अंदाजा लगा सकते हैं कि एम्बुलेंस सेवा के नाम पर सरकारी धन को डकारने के लिये जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग किस हद तक जा सकते हैं। देखना होगा कि स्वास्थ्य महकमे के इस भ्रष्टाचार रूकेगा या फिर सिस्टम की कमजोरियां इसमे फर्टीलाइजर की तरह इसे ताकत देती रहेंगी।











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