नोएडा प्राधिकरण के दामन पर
शीघ्र ही लगेगा एक और दाग, ईडी कर रही जांच
गौतमबुद्ध नगर संवाददाता (ओ पी श्रीवास्तव)। पुरे भारत में बुरी तरीके से बदनाम नोएडा प्राधिकरण के दामन पर शीघ्र ही एक और दाग़ लगने वाला है। जानकारी मिली है कि भंगेल स्थित महर्षि आश्रम में जमीन की खरीद फरोख्त मामले में अब ईडी जांच कर रही है। हालांकि, ईडी अभी फर्जी ट्रस्ट बनाकर 40 बीघा जमीन फर्जी तरीके से बेचने और 33.61 करोड़ रुपये के सर्किल रेट से कम पर जमीन बेचने के मामले में ही जांच कर रही है।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि वास्तविक लेनदेन इससे कई गुणा अधिक हुआ है। हालांकि न्यायालय में भी जमीन का कुछेक मामला लम्बित है। जानकारों का कहना है कि अवैध कॉलोनी बसाकर जमीन बेचने का मामला 100 करोड़ रुपये से अधिक का है। आश्रम की करीब 3500 बीघा जमीन है। आश्रम होने की वजह से नोएडा प्राधिकरण ने इसका अधिग्रहण नहीं किया था। वर्ष 2017 के बाद जमीन के बड़े हिस्से पर अवैध शहर बसना शुरू हो गया था।
प्रभावशाली लोगों ने खेत और खाली जमीन को महर्षि आश्रम संचालको से सीधे छोटे भूखंड खरीदारों के पक्ष में रजिस्ट्री करा दी गई। इससे प्रभावशाली लोगों का नाम कहीं रिकॉर्ड में नहीं आ सका। ऐसा नहीं है कि शहर एक दिन में बस गया। बताया जा रहा है कि 2019 से पहले यहां कच्चे रास्ते थे। इसके बाद देखते ही देखते सड़कें नाली, सीवर और पानी की पाइप लाइन बिछा दी गई। बिजली के खंभे खड़े हो गए। छोटे-छोटे भूखंडों पर मकान-दुकान और मॉल खड़े हो गए। मल्टी स्टोरी बन गई। आठ-दस मंजिला फ्लैट भी बने हैं।
इसमें महीनों लगे होंगे, लेकिन इस दौरान प्राधिकरण कुम्भकरणी नींद सोता रहा एवं चुप्पी साधे रहा। जबकि अवैध निर्माण रोकने की जिम्मेदारी पूरी तरह से प्राधिकरण की थी। लेकिन चांदी के चन्द सिक्कों की एवज में जिम्मेदारो ने अपनी ज़मीर बेच दी। प्रदेश सरकार को दिखाने के लिए सिर्फ नोटिस देने की औपचारिकता की गई। इससे आगे कार्रवाई नहीं की गई। जिससे प्राधिकरण की चुप्पी पर भी अब सवाल खड़ा हो गया है। लोगों का कहना है कि इतना बड़ा अवैध शहर प्राधिकरण अधिकारियों की मिलीभगत के बिना बसाना संभव नहीं है।
सवाल यह है कि जब जमीन पर निर्माण हो रहा था, तब प्राधिकरण के अधिकारी आखिर कहां थे? क्या इतनी बड़ी अवैध बसावट बिना प्रशासनिक संरक्षण के संभव थी? ईडी की जांच का दायरा बढ़ा तो प्रॉपर्टी डीलर व कॉलोनाइजर के साथ प्राधिकरण अधिकारी भी जांच के घेरे में आ सकते हैं। कहा जा रहा है कि यदि प्रकरण में ईमानदारी से जांच हुई तो प्राधिकरण में तैनात ईमानदारी का दम्भ भरने वाले अच्छे अच्छे अधिकारियों के मूंह पर कालिख पुत जाएगी और वे जेल में होंगे।












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