लखनऊ अग्निकांडः समय से बायोमेट्रिक लाक
खुलता और छत पर जाने का रास्ता होता न होती इतनी मौतें
लखनऊ। अलीगंज इलाके मे तीन मंजिला इमारत में लगी आग में 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे मे बाल-बाल बचे दूसरी मंजिल पर स्थित एनिमेशन सेंटर में काम करने वाले आसिफ ने बताया कि उनके पास केवल दो विकल्प थे, ’या तो अंदर दम घुटने से जान गंवा दें या इमारत से कूदकर बचने की कोशिश करें’। आसिफ आग से बचने के लिए लपटों से घिरी इमारत से कूद गए।
उनका इलाज जारी है और दोनों हाथ सहित शरीर के कई हिस्स झुलस गये हैं। आसिफ ने एक टीवी चैनल को बताया कि सोमवार अपराह्न करीब दो बजे वह और अन्य कर्मचारी भोजन कर रहे थे कि तभी उन्हें बताया गया कि इमारत में कुछ समस्या है और सभी लोग बाहर निकल जाएं। उन्होंने कहा, ’’हमें आग लगने की जानकारी नहीं दी गई। लगा कि शायद मामूली शॉर्ट सर्किट होगा, क्योंकि पहले भी ऐसा हो चुका था।’’
आसिफ ने बताया कि उन्होंने बायोमेट्रिक लॉक के जरिए बाहर निकलने की कोशिश की लेकिन बिजली चले जाने के कारण सिस्टम काम नहीं कर रहा था। इसे खोलने में कुछ समय लगा और तब तक धुआं फैल गया। कुछ ही मिनटों में हालात बिगड़ गए। पास खड़े लोग एक-दूसरे को भी नहीं देख पा रहे थे। मैंने डेस्क उठाकर कांच की खिड़की तोड़ने की कोशिश की। सांस लेने के लिए गीले तौलिए से चेहरा ढका। कांच तोड़ने पर बाहर लपटें दिखाई दीं और नीचे मौजूद लोग कूदने के लिए कह रहे थे।’’
इसलिए उन्होंने सामने से कूदने का फैसला किया। सामने बिजली का तार दिख रहा था। पता नहीं था कि उसमें करंट है या नहीं लेकिन कूदना ही एकमात्र विकल्प था क्योंकि अंदर रहने पर भी जांन चली जाती। गर्मी के कारण तार पिघल रहा था और गिरने से उन्हें चोटें आईं। उन्होंने बताया कि उनके बाद चार-पांच अन्य लोग भी नीचे कूदे। छत पर जाने का रास्ता भी बंद था और अगर निकास खुला होता तो कई लोगों की जान बच सकती थी। उन्होने दावा किया कि घटना के समय एनिमेशन सेंटर में 20 से अधिक लोग मौजूद थे और इमारत में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं थे।












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