बेमियादी हड़ताल ने लगाई रजिस्ट्री मे ब्रेक,
सरकार को लग रहा करोड़ों का चूना
गाजियाबाद संवाददाता (ओ पी श्रीवास्तव)। उत्तर प्रदेश के अनेक जिलो सहित गाजियाबाद में भी उप निबंधक कार्यालयों में निबंधन (रजिस्ट्री) कार्य अभी भी बाधित है। ई-रजिस्ट्री प्रणाली और निबंधन प्रक्रिया के कथित निजीकरण के विरोध में वकीलों और बैनामा लेखकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल चल रही है, जिसके कारण कार्यालयों में कामकाज ठप पड़ा है।
हड़ताल की वजह यह है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई ’फ्रंट ऑफिस’ ई-रजिस्ट्री व्यवस्था और प्रक्रिया को निजी हाथों में सौंपने के फैसले के खिलाफ वकील और बैनामा लेखक प्रदर्शन कर रहे हैं। इस अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते गाजियाबाद सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में दस्तावेजों का पंजीकरण नहीं हो पा रहा है। हालांकि गाजियाबाद में कुछ क्षेत्रों (जैसे गाजियाबाद में राजनगर एक्सटेंशन) में नए सब-रजिस्ट्रार कार्यालय खोलने की योजना है, लेकिन हड़ताल के कारण फिलहाल सेवाएं रुकी हुई हैं।
यह स्थिति कब तक सामान्य होगी, इसके बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है क्योंकि वकीलों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। सदर तहसील के अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष अशोक वर्मा का कहना है कि हड़ताल के कारण अरबों रुपए की राजस्व की हानि प्रदेश सरकार को हो रही है लेकिन प्रदेश सरकार की हठधर्मी रवैया बरकरार है। उन्होंने कहा कि आम जनता को भी काफी कष्ट हो रहा है लेकिन प्रदेश सरकार को उसकी भी चिंता नहीं है।
श्री शर्मा ने कहा कि सरकार अपने आदेश को वापस ले कर तत्काल हड़ताल समाप्त करवा सकतीं हैं। वरना अधिवक्ता आर पार की लड़ाई लड़ेंगे। जिसकी समस्त जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की होगी। इस सम्बन्ध में गाजियाबाद के जिला अधिकारी से बात करने की कोशिश की गई लेकिन उनका फोन नहीं उठा। जबकि मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि सरकार और वकीलो के बीच का मामला है हम क्या कर सकते हैं। उधर प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहें जानें वाले नोएडा में भी जबरदस्त हड़ताल होने से प्राधिकरण को भी भारी नुक्सान उठाना पड़ रहा है क्योंकि उसकी भी रजिस्ट्री बाधित हो गई है। आम लोगों का कहना है कि सरकार को आगे आकर हड़ताल को जनहित में अविलंब समाप्त कराना चाहिए।













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