ऐसे नियंत्रित करें हाई वी.पी.- डा. वी.के. वर्मा
बस्ती जिला अस्पताल के आयुष चिकित्साधिकारी डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने के लिए आयुर्वेद में वात और पित्त दोष को शांत करना सबसे जरूरी है। प्रभावी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ हाई बीपी के लिए सबसे शक्तिशाली आयुर्वेदिक औषधि है, जो तंग रक्त वाहिकाओं को ढीला कर रक्त प्रवाह को सुधारती है। इनमे कुछ के बारे मे नीचे जानकारी दी जा रही है। आइये जानते हैं हाई वी.पी. को कैसे नियंत्रित करेंगे।
लक्षणः तेज सिरदर्द, चक्कर आना, सांस फूलना, आंखों की समस्या, धुंधला दिखाई देना या आंखों में तनाव रहना, सीने में दर्द, भारीपन, घबराहट या बेचैनी होना, या नाक से खून आनां हाई वी.पी. का संकेत है।
अर्जुन की छाल। हृदय स्वास्थ्य के लिए यह रामबाण है। अर्जुन की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से दिल की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और बीपी नियंत्रित रहता है। अश्वगंधाः तनाव के कारण बढ़ने वाले बीपी को कम करने के लिए रोज सुबह खाली पेट एक चम्मच अश्वगंधा पाउडर गुनगुने पानी के साथ लें। त्रिफला चूर्णः रात को सोते समय गुनगुने पानी के साथ त्रिफला लेने से पाचन सुधरता है और वात-पित्त संतुलित होता है, जिससे बीपी कम होता है।
घरेलू उपचारः रोज सुबह खाली पेट लहसुन की 1-2 कली चबाकर खाएं। इसमें मौजूद एलिसिन तत्व धमनियों के खिंचाव को कम करता है। आंवले का रसः आंवले में भरपूर विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। रोज सुबह खाली पेट आंवले का जूस पीने से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है। नींबू व नारियल पानीः अचानक बीपी बढ़ने पर बिना नमक-चीनी का नींबू पानी या नारियल पानी पीने से तुरंत आराम मिलता है। मेथी दानाः आधा चम्मच मेथी दाना पाउडर सुबह-शाम पानी के साथ लेने से कोलेस्ट्रॉल और बीपी दोनों नियंत्रित होते हैं।
खान-पान में बदलाव लायें
नमक की मात्रा कम करें, प्रोसेस्ड और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों से दूर रहें। अपने आहार में केला, तरबूज, हरी पत्तेदार सब्जियां और पालक शामिल करें, जो सोडियम के असर को कम करते हैं। रोजाना 15-20 मिनट अनुलोम-विलोम और गहरी सांस लेने का अभ्यास करें। यह तनाव के हार्मोन को तुरंत कम करता है। रोज सुबह या शाम को कम से कम 30 मिनट तेज गति से टहलें। इससे दिल मजबूत होता है।
होम्योपैथी मे उपचार
डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि होम्योपैथी मे हाई वीपी को नियंत्रित करने की सफल औषधियां हैं। इनमे ग्लोनाइन, बेलाडोना, एकोनाइट, वेराइटाम्योर, आरम मेट, विस्कम एल्बम, क्रैटेगस, लैकेसिस, नैट्रमम्योर, वेराट्रम एल्बम, आर्सेनिक एल्बम, फासफोरस, राउफोलिया आदि औषधियां चिकित्सक की सलाह पर उचित मात्रा मे ली जा सकती हैं।












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