कृषि व डेयरी क्षेत्र मे भारत अमेरिका
समझौता मंजूर नहीं, किसानों ने पीएम को भेजा ज्ञापन
बस्ती, 21 जुलाई। मंगलवार को भारतीय किसान यूनियन जिलाध्यक्ष विनोद कुमार चौधरी के नेतृत्व में पदाधिकारियों, किसानों, मजदूरों ने जिलाधिकारी के प्रशासनिक अधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को 15 सूत्रीय ज्ञापन भेजा। इसी कड़ी में स्थानीय समस्याओं के समाधान हेतु जिलाधिकारी को सम्बोधित ज्ञापन 11 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन सौंपने के बाद जिलाध्यक्ष विनोद कुमार चौधरी, पूर्वान्चल अध्यक्ष अनूप चौधरी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष शोभाराम ठाकुर, प्रदेश सचिव दिवान चन्द पटेल, मण्डल अध्यक्ष जयराम चौधरी, राजेन्द्र चौधरी आदि ने कहा कि सरकार किसान हितों के प्रति गंभीर नहीं है। स्थानीय स्तर पर भी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। यदि शीघ्र समस्याओं का समाधान न हुआ तो भाकियू निर्णायक आन्दोलन को बाध्य होगी। ज्ञापन में किसानों, कृषि मजदूरों और ग्रामीण भारत के हितों से जुड़े मुद्दों पर शीघ्र निर्णय लेने की मांग की गई।
भाकियू के नेताओं ने विनोद कुमार चौधरी ने कहा कि संगठन पिछले चार दशकों से किसानों के अधिकारों की लड़ाई लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से लड़ता आ रहा है। वर्तमान समय में खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य नहीं मिल रहा है। गन्ना किसानों का भुगतान लंबित है, उर्वरकों की उपलब्धता समय पर नहीं हो पा रही है तथा बाढ़, सूखा, अतिवृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
ज्ञापन में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते सहित विभिन्न मुक्त व्यापार समझौतों पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा गया कि यदि कृषि एवं डेयरी क्षेत्र को पर्याप्त सुरक्षा के बिना विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए खोला गया तो इसका सीधा असर देश के करोड़ों छोटे एवं सीमांत किसानों, दुग्ध उत्पादकों तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। भारतीय किसान यूनियन ने अपनी प्रमुख मांगों में सभी फसलों पर स्वामीनाथन आयोग की लागत मूल्य के डेढ गुना फार्मूले के अनुसार एमएसपी की कानूनी गारंटी, गन्ने का न्यूनतम 500 रुपये प्रति क्विंटल राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी), लंबित गन्ना भुगतान ब्याज सहित कराने, किसानों एवं कृषि मजदूरों की संपूर्ण ऋणमाफी, कृषि कार्य के लिए निःशुल्क बिजली तथा ग्रामीण उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की मांग की।
इसके अलावा मनरेगा में 200 दिन रोजगार और 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी, डीएपी-यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता, प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा, भूमि अधिग्रहण कानून-2013 का सख्ती से पालन, डेयरी क्षेत्र में विदेशी उत्पादों के अनियंत्रित आयात पर रोक, किसानों के पारंपरिक बीज अधिकारों की रक्षा, कृषि आधारित उद्योगों का विस्तार तथा प्रभावी एवं न्यायसंगत जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू करने की मांग भी की गई।
भाकियू ने ज्ञापन में कहा है कि कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला है। यदि किसानों की समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया तो इसका व्यापक असर पूरे देश की अर्थव्यवस्था और ग्रामीण समाज पर पड़ेगा। संगठन ने केंद्र सरकार से किसानों के हित में शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की मांग किया। ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से प्रदीप किसान, रमेश चौधरी, शिवमूरत के साथ ही भाकियू के अनेक पदाधिकारी शामिल रहे।

.jpg)









Post a Comment
0 Comments