Type Here to Get Search Results !

Bottom Ad

संपादकीय: विषाक्त होता जा रहा है राजनीति माहौल

संपादकीय: विषाक्त होता जा रहा है राजनीति माहौल
राजनीतिक माहौल इतना विषाक्त हो गया है कि अब विपरीत विचारधारा के दल एक दूसरे के आमने सामने आकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। यह स्थिति किसी एक शहर की नही है बल्कि संसद से लेकर जिलों और गावों तक यही माहौल है। नफरतों का बीज बोने वालों को शायद यही मकसद रहा होगा कि सामने से आकर विरोंध किया जाये। आज वही हो रहा है। हमे इस बात को लेकर बिलकुल हैरत नही है। 


लेकिन हम आने वाले भविष्य की कल्पना कर पा रहे हैं कि राजनीति मे विष अभी और गाढ़ा होगा। मानसून सत्र के दौरान संसद के अंदर बाहर तक जो हुआ पूरी दुनिया ने देखा। पहले तो प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुई बर्बरता और ए.के. 47 से की गई फायरिंग तथा राममंदिर मे हुई अरबों की चढ़ावा चोरी को लेकर चर्चा कराये जाने की विपक्ष की मांग पर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने सदन मे आना ही बंद कर दिया, बाद मे नैरेटिव बदलने के लिये कहा गया कि आज 3 बजे से कल तीन बजे तक चर्चा के लिये हम तैयार हैं। लेकिन संसदीय कार्यमंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि चर्चा के दौरान कोई टोका टोकी नही करनी होगी। मसलन सत्ताधारी नेता बोलेंगे और समूचा विपक्ष गूंगा होकर उनको सुनेगा।


विपक्ष ने यह शर्त मानने से इनकार कर दिया और अमित शाह संसद भवन के अपने कमरे मे बैठकर पूरे घटनाक्रम यानी संदन के बाहर हो रहे रोजाना विरोध प्रदर्शन का जायजा लेते रहे। वे संसद के भीतर विपक्ष के सवालों का सामना नही करना चाहते थे। विपक्ष का कहना था कि शर्तों के साथ ही चर्चा करवानी थी तो पूरा मानसून सत्र बीतने के बाद क्यों, यही बात संसदीय कार्यमंत्री पहले कह देते तो संसद का कीमती वक्त खराब नही होता। फिलहाल ‘‘अमित शाह सदन मे आओ’’ नारा पूरे सत्र मे गूंजता रहा और मानसून सत्र हंगामे की भेंट चढ़ गया। इस दौरान सत्ता और विपक्ष के सांसदों का आमने सामने आकर विरोध करना हैरान करने वाला था। ऐसा पहली बार देखा गया जब सत्ता के सांसद संसद परिसर मे विरोध दर्ज करा रहे हों। स्थिति तनावपूर्ण हो सकती थी और प्रतिउत्तर मे कुछ भी हो सकता था।


ऐसा ही एक मामला बस्ती जिले से सामने आया है। सोनियां गांधी पर वंदेमातरम का अपमान करने का आरोप लगाकर भाजपा नेताओं अभिनव उपाध्याय एवं अमित गुप्ता ने दर्जन भर समर्थकों के साथ मशाल जुलूस निकाला। इनका समूह नारेबाजी करता हुआ कांग्रेस दफ्तर की ओर बढने लगा। वहां 40 से 50 कांग्रेसी बैठक कर रहे थे। जैसे ही इन्हे भनक लगी कि भाजपा नेता कांग्रेस दफ्तर पर प्रदर्शन करने आ रहे हैं, वे भी जवाब देने का तैयार हो गये। भाजपा नेता पहले से डंडों मे मशाल गला रखे थे और जवाब देने के लिये कांग्रेसियों ने भी आनन फानन मे डंडे की व्यवस्था कर ली। 


दोनो दल एक दूसरे को अपनी ताकत का अहसास कराते रहे। लेकिन कांग्रेंस नेताओं ने भाजपाइयों को पार्टी दफ्तर वाली गली मे घुसने नही दिया और ‘‘चंदा चोर वापस जाओ’’ का नारा लगाकर भाजपाइयों का मुहतोड़ जवाब देते रहे। पुलिस ने भी सक्रियता दिखाई, आधे भाजपाइयों को कांग्रेस दफ्तर की ओर मुड़ने से रोकने के लिये मार्चा संभाले थे तो आधे कांग्रेसियों को उनके दफ्तर के ही निकट रोकने के लिये। वरना कुछ भी हो सकता था। कुल मिलाकर कहें तो राजनीति से आपसी समझ गायब होती जा रही है। दूसरे दलों की जनसभाओं में पहुंचकर अपने दल के नारे लगाने वाली परंपरा भाजपा ने ही शुरू की थी। अब बड़े पैमाने पर इसके नतीजे आ रहे हैं जो चिंताजनक हैं।

Tags

Post a Comment

0 Comments

Below Post Ad

MARIUM HOSPITAL

 

HOPE
LITTLE FLOWERS
MUNDERWAN

Bottom Ad