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इंजी. युवराज मेहता (Yuvraj Mehta) मामले में एसआईटी जांच पूरी, शीघ्र नपेंगे जिम्मेदार अफसर



इंजी. युवराज मेहता (Yuvraj Mehta) मामले में
एसआईटी जांच पूरी, शीघ्र नपेंगे जिम्मेदार अफसर

गौतमबुद्ध नगर, संवाददाता (ओ पी श्रीवास्तव)। युवराज मेहता की डूब कर मौत हो जाने के मामले में सबकी निगाहें अब एसआईटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि युवराज की मौत के लिए कौन जिम्मेदार है। कयास लगाए जा रहे हैं कि जिले के कई बड़े अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। क्योंकि एस आई टी मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपने वाली है।


कभी-कभी एक मौत सिर्फ हादसा नहीं होती वह पूरे सिस्टम पर सवाल बन जाती है। इंजीनियर युवराज मेहता की मौत भी कुछ ऐसा ही है जिसमें एक युवा इंजीनियर की जिंदगी तो चली गई लेकिन पीछे छोड़ गई सैकड़ों सवाल और जवाब तलाशती 600 पन्नों की फाइल। नोएडा के सेक्टर 150 में हुए इस दर्दनाक हादसे की जांच कर रही एसआईटी अपनी प्राइमरी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सबमिट कर सकती है। इस रिपोर्ट पर न सिर्फ पीड़ित परिवार, बल्कि पूरा प्रशासन और शहर की नजरें टिकी हैं। इंजीनियर युवराज मौत केस की जांच लगभग पूरी हो चुकी है। 


एसआईटी ने करीब पांच दिन तक रोजाना लगभग आठ घंटे नोएडा अथॉरिटी के सेक्टर छह स्थित कार्यालय में रहकर दस्तावेजों, फाइलों और जिम्मेदारियों की परतें खोलीं। इस दौरान पुलिस कमिश्नर, डीएम, डीसीपी, एसीपी, सीएफओ सहित नोएडा अथॉरिटी के एसीईओ, डीजीएम सिविल, ट्रैफिक सेल और संबंधित विभागों के कई अधिकारी मौजूद रहे। सूत्रों के मुताबिक नोएडा अथॉरिटी, पुलिस और डिजास्टर मैनेजमेंट विभाग की ओर से एसआईटी को 600 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट सौंपी गई है जिसमें घटनास्थल से जुड़ी हर कड़ी दर्ज है। एसआईटी की रिपोर्ट सामने आने के बाद कई अधिकारियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है। अथॉरिटी के संबंधित विभागों में हलचल तेज हो गई है।

 

सूत्र बताते हैं कि शनिवार दोपहर 1ः30 बजे से रात करीब 9 बजे तक एसआईटी की टीम अथॉरिटी में मौजूद रही। इस दौरान चश्मदीद मोनिंदर से भी लगभग साढ़े छह घंटे तक पूछताछ की गई। दूसरी तरफ स्व0 इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के बाद आयोजित शोक सभा के पश्चात उनके पिता पहली बार मीडिया के सामने आए। आंखों में आंसू थे लेकिन आवाज में इंसाफ की तड़प साफ झलक रही थी। उन्होंने मीडिया और सरकार का धन्यवाद किया लेकिन साथ ही उस दो घंटे की लापरवाही का काला सच भी सामने रख दिया। भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि उनका बेटा साहसी था। 


जलभराव वाले अंधेरे गड्ढे में गिरने के बाद भी युवराज ने करीब दो घंटे तक मौत से संघर्ष किया। वह मदद की उम्मीद में जूझता रहा लेकिन सिस्टम की लापरवाही ने उसे अकेला छोड़ दिया। युवराज के पिता ने कहा कि अगर समय रहते कोई पानी में कूद जाता, या वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होते तो आज उनका बेटा जिंदा होता। आखिर क्यों सब एक-दूसरे का मुंह देखते रहे। यह हादसा नहीं बल्कि लापरवाही की पराकाष्ठा थी। शोक सभा में युवराज के पिता ने घटना के चश्मदीद मुनेंद्र की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि मुनेंद्र ने अपनी जान की परवाह किए बिना पानी में छलांग लगाई और युवराज को बचाने की पूरी कोशिश की। संसाधनों की कमी और सिस्टम की विफलता के कारण वह सफल नहीं हो पाया। लेकिन उसकी कोशिश को कभी भुलाया नहीं जा सकता। युवराज के पिता ने कहा कि यदि वह बेटे की बात मानकर विदेश चले गए होते तो शायद यह दिन देखने को नहीं मिलता। उन्होंने बताया कि युवराज की मां पहले ही स्वर्ग सिधार चुकीं हैं अब उनके ज़ीने का कोई मकसद नहीं रहा।

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