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एवरेस्ट बेस कैंप (EBC) से वापस लौटने पर बस्ती की बेटी (Hina Khatoon) का हुआ जोरदार स्वागत



एवरेस्ट बेस कैंप (EBC) से वापस लौटने पर
बस्ती की बेटी (Hina Khatoon) का हुआ जोरदार स्वागत

बस्ती, 18 मई।
एवरेस्ट बेस कैंप (EBC) फतह कर लौटी बस्ती की बेटी, बलरामपुर स्टेडियम की हैंडबाल कोच हिना खातून (Hina Khatoon) का मीडिया दस्तक कार्यालय मे जोरदार स्वागत किया गया। मीडिया दस्तक न्यूज के संपादक अशोक श्रीवास्तव एवं रामसजन यादव ‘गुरूजी’ ने हिना को अंगवस्त्र व पुष्प भेट कर उसका हौसला बढ़ाया। इस अवसर पर हैंडबाल की नेशनल चैंपियन हिना खातून ने ऐवरेस्ट बेस कैंप के अपने अनुभवों को साझा किया।



हिना के मुताबिक काठमांडू से लुकला एअरपोर्ट पर पहुंचने के उपरान्त बेस कैंप के लिये चढ़ाई शुरू हुई। यह दूरी आना जाना मिलाकर कुल करीब 130 किमी. है। बीच बीच मे स्टे करने के लिये चौकियां बनाई गई हैं। यह दूरी तय करने मे 11 दिन लगे। शुरूआत मे रास्ते सहज हैं लेकिन कुछ दूर आगे बढ़ने पर जैसे जैसे हम हाइट पर जाते हैं पेड़ पौधे कम हो जाते हैं और आक्सीजन घटती जाती है। जिनका आक्सीजन लेवल कम होता है उन्हे सिलेंडर साथ ले जाना पड़ता है। फिलहाल हमे और हमारे साथ तीन अन्य लड़कियो का आक्सीजन लेवल आखिरी तक बना रहा इसलिये हमे सपोर्ट नही लेना पड़ा। 


हिना ने बताया कि यह ट्रिप बलरामपुर जिला प्रशासन की ओर से थी। वरना इतना खर्च उठाकर शायद हम कभी बेस कैंप तक नही जा पाते। इसमे बलरामुपर के डीएम और सीडीओ का सहयोग रहा। रास्ते मे बहुत सारी चुनौतियां आईं, कुछ डेथ भी हुई, जिन्हे अपनी आखों से देखा गया, पीने योग्य पानी मुश्किल से मिलता था। एक कप गरम पानी के लिये 250 रूपये और एक बोतल पानी के लिये 500 रूपये चुकाने होते थे। एक टाइम का भेजन 1100 रूपये मे था। कई लोगों को थक हारकर बीच रास्ते से वापस होते देखा। लेकिन हौसला कायम रहा और पीछे मुड़कर नही देखा। 


बेस कैंप पहुंचकर जैसे ही हाथ मे तिरंगा लिया और भारत माता की जय के नारे लगाये, कई अन्य राज्यों के लोग भी पास आ गये। काफी मुश्किलों भरे इस सफर के बाद तिरंगे को सीने से लगाया और भारत माता का जयघोष किया, सारा दर्द गायब हो गया। वह सुकून शायद हम शब्दों मे बयां नही कर सकते। एवरेस्ट बेस कैंप (EBC) से वापस लौटने के बाद बलरामपुर से लेकर बस्ती तक उसका जगह जगह स्वागत हो रहा है। हिना का कहना है कि जब एक बार इरादा कर लो कुछ पाने का तो उसी के लिये जियो और उसी के लिये मरो। पक्का इरादा सभी बिघ्न बाधाओं को रास्ते से हटाकर खुद मार्ग प्रशस्त करता है। हिना खातून (Hina Khatoon) का जीवन भारत के युवाओं खास तौर से बेटियों के लिये प्रेरणास्रोत है।

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